
कभी जहां नोट्स और नॉलेज की बातें होती थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा है… वाराणसी के एक कॉलेज का गलियारा—जहां कल तक दोस्ती थी, आज वही जगह ‘क्राइम सीन’ बन चुकी है। एक छात्र… चार गोलियां… और पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में।
कैंपस में कत्ल: दिनदहाड़े मौत का तांडव
Uday Pratap College शुक्रवार की सुबह, जब क्लासेस चल रही थीं— 23 वर्षीय छात्र सूर्य प्रताप सिंह को बेहद करीब से गोलियों से भून दिया गया।
हमलावर? उसका अपना ही साथी छात्र—मंजीत चौहान
गवाहों के मुताबिक सिर और सीने पर निशाना, 4 राउंड फायर फिर फिल्मी स्टाइल में फरार। क्लासरूम नहीं, यह पूरा सीन किसी Crime Thriller जैसा था।
अस्पताल तक दौड़… लेकिन जिंदगी हार गई
सूर्य को पहले निजी अस्पताल, फिर ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया…लेकिन जिंदगी की ‘फाइल’ वहीं बंद हो गई। वो सिर्फ एक छात्र नहीं था अपने माता-पिता का इकलौता बेटा, दो बहनों का भाई एक परिवार का पूरा ‘भविष्य’। अब घर में सिर्फ खामोशी है… और सवाल।
पिता की हुंकार: “एनकाउंटर से पहले अंतिम संस्कार नहीं”
सूर्य के पिता का बयान पूरे सिस्टम को चीरता हुआ निकलता है “जब तक आरोपी का एनकाउंटर नहीं होगा, अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।”
ये सिर्फ गुस्सा नहीं ये उस भरोसे का टूटना है, जो लोग कानून पर रखते हैं।
कैंपस बना रणभूमि: छात्रों का फूटा गुस्सा
हत्या के बाद जो हुआ, उसने हालात और बिगाड़ दिए:
- कॉलेज गेट पर ताला
- तोड़फोड़ और वाहनों को नुकसान
- शिक्षकों पर हमला
- एक शिक्षक घायल
Varanasi का ये कैंपस अब ‘एजुकेशन ज़ोन’ नहीं, ‘टेंशन ज़ोन’ बन चुका है।

पुलिस का दावा vs जमीन की हकीकत
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के मुताबिक “यह निजी विवाद का मामला है” लेकिन सवाल ये अगर विवाद इतना पुराना था, तो कैंपस में हथियार कैसे पहुंचा? सुरक्षा कहां थी?
‘Education System या Action System?’
आज का सच्चाई चेक कॉलेज में attendance कम, हथियारों की entry ज्यादा। नोटबुक से ज्यादा ‘नेटवर्क’ काम आ रहा। कभी कहा जाता था “पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब…” अब लगता है “बच गए तो बनोगे!”
कानून vs गुस्सा: आगे क्या?
इस केस में तीन बड़ी चुनौतियां साफ हैं:
- आरोपी अभी भी फरार
- कैंपस में सुरक्षा पर सवाल
- छात्रों में बढ़ता आक्रोश
अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो ये मामला सिर्फ हत्या नहीं— एक बड़ा Law & Order Flashpoint बन सकता है।
भारत के कई कॉलेज अब सिर्फ पढ़ाई के केंद्र नहीं रहे— ये छोटे-छोटे ‘पावर जोन’ बन चुके हैं, जहां पर्सनल रंजिश, पॉलिटिक्स और इगो मिलकर विस्फोट करते हैं।
डर का नया एड्रेस—कैंपस?
एक सवाल जो हर माता-पिता पूछ रहा है— “क्या हमारा बच्चा कॉलेज में सुरक्षित है?” और इस सवाल का जवाब अभी…किसी के पास नहीं।
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